व्यापमं घोटाला : शिवपुरी के दो वन रक्षक को सजा, दूसरे से परीक्षा दिलाकर वन रक्षक बने, 7-7 साल की कैद,राजधानी की विशेष अदालत ने सुनाई सजा।

व्यापमं घोटाला : शिवपुरी के दो वन रक्षक को सजा,
दूसरे से परीक्षा दिलाकर वन रक्षक बने, 7-7 साल की कैद,राजधानी की विशेष अदालत ने सुनाई सजा।

वन रक्षक परीक्षा में अपने स्थान पर दूसरे व्यक्ति को शामिल कराकर चयनित हुए दो उम्मीदवारों को राजधानी की विशेष अदालत ने सात-सात साल की कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई है। शुक्रवार को सजा का यह फैसला सीबीआई (व्यापमं प्रकरण) के विशेष न्यायाधीश नीतिराज सिंह सिसौदिया की कोर्ट ने सुनाया है। कोर्ट ने टिप्पणी की है कि इस प्रकार के अपराधों से संपूर्ण चयन प्रकिया, युवावर्ग एवं समाज गंभीर रूप से प्रभावित होता है। अयोग्य एवं बेईमान अभ्यर्थी के शासकीय सेवक के रूप में चयन होने के दुष्परिणामों की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। शासन की तरफ से मामले में पैरवी विशेष लोक अभियोजक सुनील श्रीवास्तव ने की।
व्यापमं द्वारा आयोजित वन रक्षक भर्ती परीक्षा- 2012 में ग्राम बछोरा, पोहरी (शिवपुरी) निवासी लखनलाल जाटव ने आवेदन किया था। एग्जाम सेंटर शा. एसएमएस पीजी कॉलेज शिवपुरी था।
परीक्षा 15 अप्रैल 2012 को हुई थी। वन रक्षक भर्ती परीक्षा-2013 के लिए तेज सिंह जाटव ने आवेदन किया था। एग्जाम सेंटर अशासकीय गुरुनानक उ मा विद्यालय शिवपुरी था। परीक्षा 2 मार्च 2013 को हुई थी। एसटीएफ को शिकायत मिली थी कि उम्मीदवार लखनलाल और तेज सिंह ने परीक्षा पास करने के लिए कूट रचित दस्तावेज तैयार कर अपने स्थान पर दूसरे व्यक्ति को परीक्षा में बैठाया था। एसटीएफ ने वर्ष 2021 में दोनों के खिलाफ धोखाधड़ी समेत विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया था। दोनों उम्मीदवारों को राजधानी की विशेष अदालत ने सात-सात साल की कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई है। फिलहाल दोनों वन आरक्षक कोलारस में पदस्थ है ।

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