पिता की आखों से नहीं सूख रहे आंसू,बेटे के शव के इंतजार में बैठा है पूरा परिवार केंद्रीय मंत्री सिंधिया से गुहार- शव दिलवा दो

पिता की आखों से नहीं सूख रहे आंसू,बेटे के शव के इंतजार में बैठा है पूरा परिवार
केंद्रीय मंत्री सिंधिया से गुहार- शव दिलवा दो


शिवपुरी…. कोलारस के नेतवास के रहने वाले शेर सिंह शेरा सरदार की तो जैसे सारी दुनिया ही ऊजड़ गई ।बड़े ही लाड़ प्यार से जिस बेटे को पढ़ाया लिखाया बड़ा किया उसके शव को वह कैसे देखे । शेरा सरदार की आंखों से बात करते समय आंसू रुक नहीं रहे है । उन्होंने कहा कि मैंने बेटे को कई बार मना किया कि कोई जरूरत नहीं है बाहर जाकर पढ़ने की । लेकिन उसकी ज़िद के आगे एक बाप झुक गया और उसे दो महीने पहले ही केलिफोर्निया जाने की इजाजत दे दी । क्या पता था कि अब वो वहां से कभी वापस नहीं लौटेगा । बेटे की मौत को 48 घंटे हो गए हैं,
लेकिन अब तक उसका शव शिवपुरी आने का कोई संदेश नहीं मिला है। हालांकि इस संबंध में ब्राजील दूतावास से बात हुई है पर बेटे का शव कब तक आएगा पता नहीं। दुखी होकर पिता ने शनिवार को
केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को पत्र लिखा है, जिसमें गुहार लगाकर कहा है कि महाराज, अंतिम बार बेटे का चेहरा देख सकूं, इस वजह से शव को विदेश से भारत लाने की व्यवस्था करवा दीजिए। पीड़ित पिता शेर सिंह (शेरा) निवासी गांव नेटवास तह. कोलारस ने पत्र में लिखा है कि वह शिवपुरी मध्य प्रदेश का रहने वाला है। बेटा नवजोत सिंह (23 वर्ष) बीबीए की पढ़ाई करने कैलिफोर्निया गया था, और इसके बाद जब 10 दिन की ब्राजील यात्रा पर मेरे चचेरे भाई देवेंद्र के साथ गया तो वहां मलेरिया फेल्सीफेरम हुआ जिसकी वजह उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। उसकी हालत बिगड़ती गई और अंततः उपचार के दौरान उसकी मृत्यु 24
नवंबर को हो गई। इस संदर्भ में पीड़ित पिता के आवेदन और दस्तावेज को केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया तक पहुंचाया। इसके बाद नागरिक उड्डयन
मंत्री के दिल्ली कार्यालय से डीपी जोशी का फोन आया और उन्होंने इस संदर्भ में ब्राजील में विदेशी दूतावास से बात कर जल्द शव वापस लाने के प्रयास करने की बात कही। पिता ने पत्र में यह भी लिखा है कि इकलौता बेटा था, इस वजह से अंतिम समय में भी उसका चेहरा देखकर हम उसका अंतिम संस्कार कर सकें तो जीवन में इस बात का गम नहीं रहेगा कि वह बेटे का अंतिम समय मुंह भी न देख सके। हालांकि इस संदर्भ में ब्राजील दूतावास से कलेक्टर शिवपुरी रवींद्र कुमार चौधरी की भी बात हुई। पर अब तक यह स्पष्ट नहीं लग सका है कि शव कब तक भारत आ सकेगा।

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